Hindi Kavita “Jeene Ki Aas” for all supporters of India Against Corruption – IAC


I am dedicating this Hindi Kavita- “Jeene Ki Aas” to millions of supporters of India against Corruption. This poetry is written by me in honour of Shri Anna Hazare ji’s struggle against adamant politician and their corrupt practices. While Mahatma Gandhi has been referred in this poem, I hope my small contribution through this poem will remind fellow citizens about Bapu’s dream of “Ram-Rajya”, where every countrymen will be treated equal in reality and not only on papers(Constitution).
जीने की आस 

यह भारत की जो तस्वीर है,
इसका किस्सा कुछ अजीब है |
हर दशकों में, हर सदियों में,
बदलते रहना इसकी तकदीर है ||

आर्यों से बना यह आर्यावर्त,
भरत से यह बना भारत देश |
शांति, सत्य और अहिंसा की,
देता रहता सबको सन्देश ||

फिर हाड़ मांस का एक प्राणी आया,
वो राम-राज्य की कल्पना लाया |
ऐ नादिर, तुम्हें मयूर मुबारक,
ऐ फिरंगियों, तुम्हें कोहिनूर मुबारक ||

पर छोड़ो अब मेरे देश को,
इस धरती को, इस परिवेश को |
भारत को राम-राज्य बनाना है,
मुझे अपना देश जगाना है ||

नहीं होगा कोई भूखा, ना ही गरीब,
चाहे वो हो ब्राह्मण, और हो फकीर |
हर पेट को रोटी, हर हाथ को काम,
लड़ेंगे हम मिलके, एक महासंग्राम ||

पर बापू, पाकर इस आजादी को,
हमने क्या है हासिल किया ?
पोंछ न सके हर आँख से आंसू ,
दे न सके हर हाथ को काम ||

किसान जो हमारे अन्नदाता थे,
आज उनके घरों में मातम है |
न चूल्हा जलता है, न रोटी पकती है,
घर भी खाली है, जमीन भी परती है ||

मजदूरों के बच्चे मजदूर बने रहें,
नहीं होता है ये इनके कर्मों का फल |
अरे, ये तो वो चाहते हैं हम सब गरीब रहें,
रोटी उनकी सीकें, और सत्ता के करीब रहें ||

इन देश निर्माताओं के कर्मों से,
बेदर्दों और जालिमों के अधर्मों से |
अमीर और अमीर होते गए,
गरीब और गरीब होते गए ||

बापू, जबसे तूने इस देश को छोड़ा,
इस देश की यह बदहाली है |
केवल रिश्वत है और दलाली है,
कहीं फटेहाली है, तो कहीं खुशहाली है ||

कहतें है कि, हमारे देश का विकास हुआ,
पर विकास उनका हुआ, हमारा तो विनाश हुआ |
अब तो हमें दिलासा कोई देने भी नहीं आता,
आवाज़ करो, तो हमें चुप रहने को कहा जाता ||

चुप तो हैं हम, पर अब हमसे रहा नहीं जाता,
कब के सूखे हमारे आंसूं, अब उन्हें पोछा नहीं जाता |
क्या करूँ, हम तो तुम्हारे सच्चे बन्दे हैं,
गुस्सा तो बहुत है, पर हिंसा किया नहीं जाता ||

हमें याद है तुम्हारा प्रेम, समर्पण और बलिदान,
हो तो गयी है देर, पर कहो दो इन्हें फिर से आज |
कि बंद करें ये नाटक, और बंद करें परिहास,
देना है तो दे दे ये हमें, जीने की कोई आस ||

– Ajay K Mishra

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About Ajay Mishra
A technocrat who believes in deep rooted values of Indian culture and passionate about writing on issues related to social cause. Loves to travel across the globe and meet people from various cultural background. Fitness and yoga freak and loves light and soothing music. I love blogging and writing on issues related to common cause and my field of expertise. See my blog at: http://mycardclub.com https://ajaykmishra.wordpress.com

3 Responses to Hindi Kavita “Jeene Ki Aas” for all supporters of India Against Corruption – IAC

  1. Benu DUTTA says:

    Superb…………………… U r genious

  2. meenakshi says:

    great sir its too impressing same as benu WE Will Crush the corruption thanxxxxxxxxxxxxxxxxxxx ……………

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